हमन है इश्क़ मस्ताना – कबीर

The best version by Shri Madhup Mudgal

કોઈ કથા નઈ આજે… કબીર ની મારી ફેવરિટ રચના… સાંભળો, વાંચો, વાંચીને સાંભળો અને રીપીટ કરો…


हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ?
रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ?

जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,
हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ?

खलक सब नाम अनपे को, बहुत कर सिर पटकता है,
हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ?

न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से,
उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ?

कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से,
जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?

– कबीर


जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?

वाह… वाह… અને वाह…


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