अच्छा – खराब by Dr. Anurag Arya

बिछुड़ा हुआ जब कोई मिलकर असल जिंदगी के किरदार में से “अच्छे” लोगो का जिक्र करता है तो मै साथ साथ कुछ “ख़राब” लोगो को याद करता हूँ .

बचपन में मोहल्ले के बच्चो की भीड़ में “सबसे अच्छे “माने जाने वाले शख्स की बूढी माँ बीमार हालात में भी अपने पति को लेकर रिक्शा में दरबदर जुदा जुदा डोकटरो के यहाँ भटकती फिरती है .मुंह से उन्होंने अपने दोनों बेटो की शिकायत नहीं की है , जानता हूँ कभी करेगी भी नहीं। पर ये भी जानता हूँ के उनके बेटो की अब दूसरे शहर में नौकरी करने की “मजबूरी” वाली स्टेज नहीं रही है। ना उन्हें अपने पास बुलाने की प्रेक्टिकल मुश्किलें रही है ।

“खराब “कहे जाने वाली लड़की अपने हसबैंड की पेराप्लेजिक माँ की देखभाल के वास्ते अपना फुल फ्लैज्ड कैरियर छोड़ चुकी है .जिसकी तनख्वाह से वो फुल टाइम नर्स आराम से एफ़ोर्ड कर सकती थी उस बुरी लड़की को अपने बच्चे ओर इस ज़िम्मेदारी को लेकर न कोई कोफ़्त है ,न कोई शिकवा । वो हमेशा मुस्कराती हुई मिलती है।

वक़्त भी मुआ ” अच्छे -ख़राब” के पाले बदल देता है !

P.S –
सुना है बरसो से आत्मा को “जागते” रहो के हुंकारे लगाते चौकीदार के वोकल कार्ड को रेस्ट की सलाह मिली है. ज़िद्दी है पर मानता नहीं…!

Dr. Anurag Arya


This is from my FB contact Dr. Anurag Arya from Meerut. He is an FB friend whom I don’t know personally, even can’t remember how we became friends through FB…!

कुछ लोग भी FB की पोस्ट की तरह होते है… देखते ही भा जाते है… खुशबू जैसे अफसाने वाले लोग…

The way he sees the world and they way he narrates… I am a fan, always.

Above pic and writeup is posted the same way he has posted on his FB page.

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